इस निर्जला एकादशी को महाएकादशी, पांडव एकादशी, भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है। 

निर्जला एकादशी के दिन 18 तरीक सुबह सूर्य उदय से लेकर अगले दिन सूर्य उदय तक मुँह में जल नहीं लेना है। 

इस दिन दान की बहुत महिमा है जल से भरे घड़े का दान, पंखे का दान, फलों का दान, गौ दान, शर्बत का दान आदि का दान कर सकते है 

इस एकादशी का पारण समय 19 तारिक को सूर्य उदय से लेकर 5:52am मिनट तक है

व्रत का पारण भगवान के चरणामृत और तुलसी दल से करना चाहिए।

इस दिन भगवान का खूब नाम जाप, कीर्तन और कथा पढ़नी चाहिए।